सुप्रीम कोर्ट के दिशानिदेशों की बीसीसीआई में साफ तौर पर अवहेलना की जा रही : केवीपी राव

सौरव गांगुली , जय शाह ,संयुक्त सचिव जयेश जार्ज सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के खिलाफ अपने पदों पर बने हुए हैं

रांची : बिहार रणजी टीम के पूर्व कप्तान और लगभग एक दशक तक बीसीसीआई से जुड़े रहने वाले के वी पी राव ने आज रांची प्रेस क्लब में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में वर्तमान में बीसीसीआई के पदाधिकारियों के क्रियाकलापों पर कई गंभीर सवाल खड़े किए। बीसीसीआई के साथ एक दशक तक कार्य करने के अपने अनुभवों को साझा करते हुए श्री राव ने कहा कि बीसीसीआई एक बेहतरीन संस्था है जो बहुत से परिवारों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष जीविका प्रदान करता है।
लेकिन पूर्व में और वर्तमान में कई तरह की विसंगतियां पाई जा रही है. जिसके चलते बीसीसीआई की बदनामी होती है। उन्होंने बीसीसीआई के प्रति आभार जताया कि उनको इतने लंबे समय तक काम करने का अवसर प्रदान किया गया।
दिसंबर 2020 में बीसीसीआई से असंवैधानिक तरीके से बर्खास्त किये गये श्री राव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिदेशों की बीसीसीआई में साफ तौर पर अवहेलना की जा रही है। जुलाई 2020 में संविधान की अवहेलना कर हेमांग अमीन की अंतरिम सीईओ पद पर नियुक्ति की गयी थी लेकिन मैंने उसी समय मेल कर यह सवाल उठाया था कि यह पद बीसीसीआई के संविधान की अवहेलना है। आलम यह है कि अंतरिम सीईओ का कार्यकाल जुलाई में दो साल का हो जाएगा लेकिन वे आज तक उस पद पर बने हुए हैं। अभी तक नियमित सीईओ की नियुक्ति नहीं हुई है। बीसीसीआई अध्यक्ष सौरभ गांगुली, सचिव जय शाह और संयुक्त सचिव जयेश जार्ज के कार्यकाल को लेकर उन्होंने सवाल किये कि छह साल की अवधि के बाद इनका कार्यकाल समाप्त होना था और इनको कूलिंग आफ में जाना था लेकिन वे अभी भी पद पर बने हुए हैं। जो सुप्रीम कोर्ट स्वीकृत बीसीसीआई की साफ अवहेलना है।
.यह पूछे जाने पर कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर सौरव गांगुली के बीसीसीआई अध्यक्ष बनने के बाद इस संस्था में क्या बदलाव आया है तो श्री राव ने कहा कि उनके आने के बाद एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर( सबा करीम) ने इस्तीफा दिया जबकि एक फर्स्ट क्लास क्रिकेटर( के वी पी राव) को बर्खास्त किया गया। इनके आने के बाद वीसीसीआई में काम करने वाले 10 लोगों ने इस्तीफा दिया । श्री राव को बीसीसीआई में दिसंबर 2020 को बर्खास्त कर दिया था । यह पूछे जाने पर कि इतने लंबे समय तक वे चुप क्यों रहे तो श्री राव ने कहा कि उन्होंने बर्खास्तगी के पहले भी र्कई पत्र लिखे थे और पिछले करीब डेढ साल में उन्होंने बीसीसीआई को मेल के जरिए कई पत्राचार किए लेकिन कोई जवाब नहीं मिलने पर सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में आईए दाखिल करना पड़ा। इस मुद्दे पर मुझे सुप्रीम कोर्ट से पूरी उम्मीद है ।श्री राव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में आईए फाइल करने के बाद भी बीसीसीआई में कई असंवैधानिक काम हुएहैं जिसके कारण आज मुझे मीडिया के सामने आना पड़ा।
श्री राव ने कहा कि बर्खास्तगी का जो पत्र उनको मिला था उसमें तीन माह का वेतन देने की बात थी लेकिन चार माह तक उनको वेतन नहीं दिया गया। उन्होंने जब कानूनी नोटिस भेजी तो उसके छह दिन के भीतर उनको भुगतान कर दिया गया। इससे साफ है कि उनको तंग करने के लिये उनका वेतन रोका गया था।
एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह लगातार बीसीसीआई की क्रिया के कार्यप्रणाली को लेकर कई सुझाव देते रहे और कई सवाल भी उठाते रहे ।
श्री राव ने कहा कि उनको टी 20 विश्व कप का लोकल आर्गनाइजिंग कमिटी(एलओसी) का निदेशक बनाया गया था। लेकिन उनकी नियुक्ति को ्िकसी से शेयर नहीं कियागया जिस कारण वे इस महत्वपूर्ण अवसर का अनुभव प्राप्त करने से वंचित हो गये। इस दौरान उनको कई अतिरिक्त महत्वपूर्ण्र जिम्मेदारियां भी दी गयीं । अगस्त -सितंबर 2020 में वे जब दुबई में थे तो बीसीसीआई अध्यक्ष सौरभ गांगुली ने उन्हें आईसीसी के साथ टी 20 को लेकर होने वाली बैठक में भाग लेने को कहा था। श्री राव ने सवाल किया कि आखिर दो तीन माह में ऐसा क्या हो गया कि दिसंबर में उनको बर्खास्त कर दिया गया।
श्री राव ने कहा कि इस दौरान उनके एक मित्र ने उनसे कहा कि तुम इतने पत्राचार क्यों करते हो, मैंने सुना है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद वे तुम्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं। तुम्हारे हाथ पैर तुड़वाकर बीसीसीआई के सामने भीख मांगने पर मजबूर कर दिया जाएगा। मैंने इसके बाद तुरंत सौरभ को मेल कर इस बावत जानकारी दी और पूछा कि क्या ऐसा कुछ किया जाना है जैसा कि मैंने सुना है लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल ने मुझसे कहा कि इतना मेल क्यों भेजते हों। मैंने कहा कि जो गड़बडिय़ां मुझे दिखती हैं, उसे ही दर्शाता हूं। लेकिन किसी को मुझे जवाब नहीं मिला। इसपर श्री धूमल ने कहा कि तुम क्या बीसीसीआई के संविधान के कस्टोडियन हों।उन्होंने कहा कि तुम कर्मचारी हो आफिस बेयरर पर सवाल खड़े नहीं कर सकते। मुझे इस्तीफा देने को कहा। लेकिन मैंने इस्तीफा नहीं दिया तो मुझे बर्खास्त कर दिया गया।

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