टेरी और टाटा स्टील फाउंडेशन ने ग्रीन स्कूल प्रोजेक्ट के तहत ’वन, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन’ पर ऑनलाइन सत्र का आयोजन किया

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जमशेदपुर : पद्म श्री जमुना टुडू ने विद्यार्थियों को दीर्घकालिक सस्टेनेबल अभ्यास अपनाने के लिए प्रेरित किया
परिचय : ‘वर्चुअल एक्सपर्ट सेशन’ ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में वनों और जैव विविधता की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। इसका उद्देश्य सभी के लिए एक बेहतर दुनिया बनाने में स्कूल बिरादरी को उनके जीवन के सभी पहलुओं में सस्टेनेबिलिटी को आत्मसात करने में कार्यवाही करने के लिए प्रेरित करना है। पद्म श्री जमुना टुडू ने विद्यार्थियों को न केवल वन आवरण को संरक्षित करने और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए प्रेरित किया, बल्कि इस धरती की दीर्घकालिक स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) के लिए प्रकृति को वापस देने के लिए प्रयास करने को भी प्रेरित किया।
नई दिल्ली/जमशेदपुर, 28 सितंबर, 2021 : द एनर्जी ऐंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) और टाटा स्टील फाउंडेशन ने ग्रीन स्कूल प्रोजेक्ट के चौथे चरण की गतिविधियों के तहत ’वन, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन’ विषय पर विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए आज एक ऑनलाइन सत्र का आयोजन किया। ग्रीन स्कूल प्रोजेक्ट के विभिन्न सहभागी स्कूलों के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इस विशेषज्ञ सत्र में हिस्सा लिया, जिसका उद्देश्य जलवायु कार्यवाही में वनों की महती भूमिका और जैव विविधता संरक्षण की तत्काल आवश्यकता पर स्टेकहोल्डरों के बीच जागरूकता पैदा करना था।
कार्बन का पृथक करने, पारिस्थितिक तंत्र को विनियमित करने, आजीविका का समर्थन करने और जैव विविधता की रक्षा करने में वनों की भूमिका अतुलनीय है। इसके अलावा, उनकी स्वस्थ उपस्थिति जलवायु स्थिरीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन, वनों की कटाई के कारण सिकुड़ते वन आवरण और निरंतर व अनियंत्रित शहरीकरण समेत अन्य मानव-प्रेरित तनावों ने पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बिगाड़ दिया है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव हर गुजरते दिन अधिक स्पष्ट होते जा रहे हैं, इस तरह के पारिस्थितिक असंतुलन के प्रभाव वनों पर निर्भर समुदायों और जंगलों पर जीवित रहने वाली विशाल जैव विविधता, दोनों के लिए विनाशकारी साबित हो सकते हैं।
वेस्ट बोकारो, जामाडोबा, जोडा, नोआमुंडी, कलिंगानगर, सुकिंदा और आंगुल के 34 स्कूलों के 130 से अधिक बच्चे इस ऑनलाइन सत्र में शामिल हुए। साथ ही, टाटा स्टील फाउंडेशन द्वारा संचालित ‘मस्ती की पाठशाला’ के विभिन्न केंद्रों से 100 विद्यार्थियों ने भी हिस्सा लिया।
पद्म श्री जमुना टुडू, और श्री पंकज सतीजा, चीफ रेगुलेटरी अफेयर्स, टाटा स्टील ने सत्र में तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में प्रतिभागियों के साथ रूबरु हुए। सुश्री नेहा, फेलो, इन्वायर्नमेंट एजुकेशन ऐंड अवेयरनेस डिवीजन, टेरी ने सत्र का संचालन किया।
वनों और जैव विविधता के महत्व को रेखांकित करते हुए सुश्री टुडू ने कहा, “पेड़ों और पौधों के संरक्षण के अपने प्रयासों में मुझे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, लेकिन उनमें से किसी ने भी मुझे अपने लक्ष्य से नहीं रोका। अगर आपने अपना मन बना लिया है और किसी चीज के लिए आपमें जुनून है, तो उसकी ओर बढ़ते रहें, इस तरह आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त करते हैं।“
लकड़ी माफिया के खिलाफ लड़ाई के लिए टुडू को ‘झारखंड की लेडी टार्जन’ के रूप में जाना जाता है। वह 25-30 लोगों के लगभग 300 समूहों का नेतृत्व करती हैं, जो जंगलों में गश्त लगाते हैं और झारखंड के जंगलों में पेड़ों की अवैध कटाई की घटनाओं पर सतर्क करते हैं। ये समूह नये पौधे लगाते हैं और क्षेत्र के जंगलों व जैव विविधता को पुनर्जीवित करने और बनाए रखने के लिए ग्रामीणों (विशेष रूप से महिलाओं) को अपने अभियान में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
इस अवसर अपने संबोधन में श्री सतीजा ने कहा, “ऊर्जा का अकुशल उपयोग, बेलगाम संसाधन खपत और प्रतिकूल भूमि उपयोग की ओर जा रही मानवजनित गतिविधियां जैव विविधता के नुकसान और जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा दे रही हैं। जलवायु आवरण के स्थान बदलने से कुछ प्रजातियों के प्रवास के लिए बहुत कम जगह बच रही है, जिससे कई मामलों में आजीविका प्रभावित हो रही है। दुर्भाग्यवश सबसे अधिक प्रभावित वे हैं, जो कमजोर हैं और शायद स्थिति को बदतर बनाने में उनका योगदान सबसे न्यूनतम है। हर सकारात्मक कदम जैव विविधता के नुकसान को कम करने, ग्लोबल वार्मिंग को नीचे लाने और सिर पर मंडरा रही बिगड़ती असमानता को रोकने में मदद करेगा।”
सत्र में विशेषज्ञों ने ’जलवायु परिवर्तन के प्रभावों’, ‘सर्वोत्तम अभ्यासों को अपनाने’ और ‘जलवायु कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए वनों एवं जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में काम करने के लिए एक व्यक्ति क्या कर सकता है’ जैसे विषयों समेत महत्व के अन्य प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्थिरता और पर्यावरण चेतना के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित कार्यवाही करने के लिए प्रेरित करना था।
सत्र में सुश्री नेहा ने कहा, “ग्रीन स्कूल प्रोजेक्ट का चौथा चरण इन गुणों को उनमें आत्मसात करा कर पारिस्थितिक तंत्र को पुनर्स्थापित करने और कल के चेंजमेकर बनाने पर केंद्रित है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य स्थायी भविष्य के लिए धरती की रक्षा करने और उसे पुनर्स्थापित करने में विद्यार्थियों का क्षमता-निर्माण करना और सहभागी टूल्स विकसित करना है।
ग्रीन स्कूल प्रोजेक्ट औपचारिक रूप से अप्रैल 2017 में लॉन्च किया गया था, ताकि झारखंड और ओडिशा में टाटा स्टील के परिचालन क्षेत्रों में छात्र-छात्राओं को उनकी महत्वपूर्ण, अंतर-अनुशासनात्मक और समग्र सोच में सुधार करने में मदद मिल सके। प्रोजेक्ट का फोकस जागरूकता पैदा करना और विद्यार्थी व शिक्षक बिरादरी को प्रकृति के साथ अपने संबंध बेहतर ढंग से समझने में सक्षम बनाना और स्थानीय स्तर पर संसाधन प्रबंधन पहल के माध्यम से इसे संरक्षित करने के लिए ठोस प्रयास करना है।
टाटा स्टील फाउंडेशन के बारे में
टाटा स्टील फाउंडेशन (टीएसएफ) को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत 16 अगस्त, 2016 को स्थापित किया गया था। यह टाटा स्टील लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है और अपने कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापक आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय उद्देश्यों को जोड़ कर भारत के सतत विकास में एक बड़ी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए फाउंडेशन ने अपने समीपस्थ क्षेत्रों में सामुदायिक विकास (पीसीडी) कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन को प्रभावित करने के लिए अपने सामुदायिक जुड़ाव को व्यापक बनाया है, जिसमें बच्चों और किशोरों के लिए एक प्रणालीगत शिक्षा प्रक्रिया का निर्माण करना, बाल श्रम के सबसे खराब रूपों का उन्मूलन करना, हाशिए पर रहने वाले परिवारों की आय को दोगुना करना और अपने समुदायों के पेयजल और उनकी स्वच्छता के मुद्दों को संबोधित करना शामिल है। इसके पीसीडी के पूरक के रूप में इसके पास चेंज मॉडल का एक सेट है, जिसे सिग्नेचर प्रोग्राम कहा जाता है, जो अनुसंधान-आधारित विकास मॉडल को साथ लेकर चलता है, जो एक विस्तृत क्षेत्र में बड़े पैमाने पर दोहराये जाते हैं। सिग्नेचर प्रोग्राम, जो विविध संसाधन पूलों को समेकित कर सकते हैं और नागरिकों के जीवन पर प्रभाव क्षमता को गुणात्मक रूप से बढ़ा सकते हैं, फाउंडेशन को सकारात्मक बदलाव के लिए काम कर रहे सरकार और अन्य संस्थानों की एक संरचना की वकालत करने में सक्षम बनाता है। ऐसे कार्यक्रमों के कुछ पहलू ‘मानसी (मातृ और नवजात उत्तरजीविता पहल)’, ‘रिश्ता (किशोर स्वास्थ्य शिक्षा परियोजना)’, ‘थाउजेंड स्कूल प्रोग्राम’ और ‘संवाद’ जैसे कार्यक्रमों से प्रतिबिंबित होते हैं।
टेरी के बारे में
एनर्जी ऐंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टीईआरआई-टेरी) एक स्वतंत्र, बहुआयामी संगठन है, जिसके पास अनुसंधान, नीति, परामर्श और कार्यान्वयन में दक्षता हैं। इसने चार दशकों से ऊर्जा, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में बातचीत और कार्यवाही का बीड़ा उठाया है।
संस्थान के अनुसंधान और अनुसंधान-आधारित समाधानों का उद्योग और समुदायों पर एक परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ा है। नई दिल्ली में इसका मुख्यालय है, जबकि गुरुग्राम, बेंगलुरु, गुवाहाटी, मुंबई, पणजी, और नैनीताल में इसके क्षेत्रीय केंद्र और कैम्पस हैं, जो अत्याधुनिक बुनियादी ढाँचे के साथ वैज्ञानिकों, समाजशास्त्रियों, अर्थशास्त्रियों और इंजीनियरों की एक बहु-विषयक टीम द्वारा समर्थित है।

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